तत्काल जरूरत है

ईश्वर का मंथन


इस दुनिया में श्रेश्ठ धर्म क्या है?

यह कितना सत्य है यह मै नही जानता लेकिन कहनी इस प्रकार है, सभी धर्मो के भगवान की मानव के विशय में मंथन हुआ आरे अंतिम निर्णय में कहा गया कि मानव को हमने जिंदगी जीने के लिए तीन पन्ने दिए।
पहला जनम और आखरी मृत्यु का पन्ना हमने लिखा। बिच का पन्ना हमने, मानव जाती को लिखने दिया। मगर मानव अपनी सुख सुविधा में रहकर, दुसरो पर अत्याचार किया। करके हमने कुछ मानव को दुःख भरा, असाधय, विकलांग जीवन का पुर्नजीवन किया। क्यों न हम सभी भगवान ऐसे मानवो में रहकर निवास करें ताकी मानव ऐसे विकलागो की सेवा करके पूज्य का हकदार हो।
दिव्यांग मानवो मे ही ईश्वर का वास होता हैं भले हम मांगे न मांगे हमारी योग्यता , आवष्यकता के अनुसार हमे मिलता है। एक हात से दो, हजारो हाथो से लोटकर आता है।




हमारे ‘एकता’ के उपक्रम में 100 मुकबधी मानसिक विकलांग बच्चो को निःषुल्क निवास, शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण किराए के घर मे सन 1997 से चला रहे हैं किराये का घर होने से बच्चों का पुनर्वसन करने में कठीणाई निमाण हो रही है। षासन स्तर पर बच्चों के लिए जीमन और बांधकाम का कोई भी प्रावधान नही है।
संस्था ने कर्ज लेकर 5677 चै. फुट का प्लाॅट लिया हैं उस प्लाॅअ पर 4200 चै. फुट पर तीन मंजील बांधकाम करने का निर्णय लिया हैं उसका भुमीपूजन भी किया गया है।
इसलिए आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन है की संसिा के इस मानविय तथा दिव्यांग सेवा मे ईश्वरीय कार्य में आपका योगदान मिले। हाॅल, रूम, सांस्कृतीक सभागृह, होस्अेल रूम, किचन रूम आदि बनवाकर दे सकते है। या गिटटी, रेत , लोहा, सिमेंट, मुरूम या नगद राषी भी दे सकते है। आपके नगद राषी पर 80 जी अंतर्गत आयकरमें छूट उपलब्ध है।




आपकी थोडीसी मदत से .....

❒ दिव्यांग को अच्छी शिक्षा मिल सकती है।
❒  दिव्यांग का पूनर्वसन हो सकता है।
❒  दिव्यांग को उनकी योग्यतानुसार काम मिल सकता है।
❒  दिव्यांग को रोजगार मिल सकता है।
❒  दिव्यांग को समानता का अधिकार मिल सकता है।
❒  दिव्यांग को निवास मिल सकता है।



बांधकाम फोटो


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एकता बहूउद्देशीय एज्युकेशन सोसायटी , नागपूर
‘एकता’ एक धर्मार्थ, गैर मुनाफाखोर संस्था है. संस्था मुकबधीर, मानसिक विकलांग बच्चो के शिक्षण, प्रशिक्षण और पुर्नवसन का कार्य सभी सेवाभावियों के सहयोग से कर रही है।
मानसिक , विकलाग ' मानव सेवा ' ही सच्ची ईश्वर सेवा है। इससे बडा कोई धर्म नही। इसलिए इस ‘मानव सेवा’ के मिशन को आगे बढाने हम से जुडे।
धन्यवाद !