स्वयंसेवक बने

इस दुनिया में श्रेश्ठ धर्म क्या है?

      समाज और संसार में दया ही श्रेश्ठ धर्म है। अगर मानसिक, विकलांग जरूरतमंद व्यक्ती पर दया दिखाते हुए उसकी सेवा और सहायता न की जाए तो मानसिक, विकलांग कैस उन्नती करेगा? असल मे सेवा मानव जीवन का सौदर्य और षृंगार है। भगवान की सच्ची पूजा है। भुखे को भोजन देना, प्यासे को पानी पिलाना , विद्या रहीतो को विद्या देना ही सच्ची मानवता है।



‘एकता’ से क्यो जुडना चाहते ?

       इस पृथ्वी पर रहनेवाला हर कोई देता है। आदान प्रदान करता है। पेड पौधे , नदी नाले, समुद्र, पहाड, धरती, पशु पक्षी यह सब सेवाएं देते है। वृक्ष को देखिये वे आने फल, षीतल छाया, लकडी, फुल, फल, ऑक्सिजन, औषधीया, सौदर्य प्रसाधन आदि देते है। वनस्पती हमारे लिए साग भाजी की व्यवस्था करते है। प्रकृती बिना किसी भेदभाव और बिना किसी अपेक्षा के अपना काय करती है इसी से संसार चक्र चल रहा है। इस संसार में मानव ही बुध्दामान प्राणी है इसलिए परोपकार ही जीवन है। जिस मानव ने परोपकार नही किया असाहय मानवेां की सेवा नही की उस मानव के जीवन का क्या लाभ?
       इसलिए जीवन में सेवा का भाव रखकर हमसे जुडे, दिव्यांग मानवों की सेवा करें यही ईश्वर सेवा होगी।




संस्था से जुडकर स्वयंसेवक बने

1) बच्चो को सतरंज, कॅरम जैसे इनडोर खेल सिखाए।
2) शिल्प, नृत्य,गायन,संगीत, वाद्य और चित्रकला सिखा सकते है।
3) बच्चों के लिए मुवी/ पिकनिक प्लाॅन करे।
4) दवाएं खरीदने में मदद करे।
5) हमारी वेबसाइट/ ब्लाक को बनाए रखने में मदत करे।
6) उन्हें स्वयं सहायता कौषल्य प्राप्त करने मे मदत करे।
7) फंड निर्माण करने में आयोजन करे।
8) अपने संपर्को के माध्यम से इच्छुक दवाओं और फंडींग एजेंसीयों मार्फत आवष्यक बातो की पूर्र्तता करने में मदत करे।
9) एकता के विषश बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस और अन्य कार्यक्रमों मे भाग ले ।
10) मेडीकल कॅम्प के आयोजन में मदत करे।
11) क्लास रूम और होस्टल पेंट करे।
12) समाचार पत्र/वार्षिक रिपोर्ट लिखना/ तयार करना।
13) कानुनी सलाह
14) नेटवर्कींग के माध्यम से फंड निर्माण करने में सहयोग करे।
15) बच्चों को कम्प्युटर सिखाए।
16) दिव्यांग बच्चो के गुरू बनकर कार्य करे।
17) एकता के उपक्रम के बारे में नये सेवाभावियों को बताए।
18) एकता के साथ जुडकर दिव्यांग मानवेां के लिए काम करें।




एकता बहुद्देषीय एज्युकेशन सोसायटी , नागपूर
‘एकता’ एक धर्मार्थ, गैर मुनाफाखोर संस्था है. संस्था मुकबधीर, मानसिक विकलांग बच्चो के शिक्षण, प्रशिक्षण और पुर्नवसन का कार्य सभी सेवाभावियों के सहयोग से कर रही है।
मानसिक , विकलाग ' मानव सेवा ' ही सच्ची ईश्वर सेवा है। इससे बडा कोई धर्म नही। इसलिए इस ‘मानव सेवा’ के मिशन को आगे बढाने हम से जुडे।
धन्यवाद !