चिडी चोंच भर ले गयी, नदी न घटीयो नीर
दान देत धन ना घटे, कह गये दास कबीर
कडवा सच
ईष्वर ने हमे तीन पन्ने दिये पहीला पन्ना इष्वर ने खुद लीखा है। तब हमारा जनम हुआ, आखरी पन्ना इष्वर खुद लीखता है जो बिच का पन्ना हम कीस तरह भरते है हमारे कर्म का ही फल वह हमारा
हम खुद बिच का पन्ना भरते है, मगर, दिव्यांग मतिमंद बालक जीवन का पन्ना नही भर सकते इसीलीये इष्वर ने ऐसे इष्वर रूप् बालक का निर्माण करके करने कि संधी हो मानव जाती को उपलब्ध करायी यही सेवाऐ हमारा अच्छा कर्म है, जैसा कर्म रहेगा, वैसी ही हमारी मृत्यु इष्वर लीखता है।

सन्माननीय,
अभीतक संस्था किराया के घर मे निषुल्क भोजन , निवास, षिक्षा के माध्यम से बच्चो का सर्वागीन विकास करके समाज के मुख्य प्रवाह मे लाने का प्रयास कर रही है। संस्थाने बच्चो को षिक्षा और निवास के लीये 5677 चै. फुट की जगह लेकर 4200 चै. -100 बालको को षिक्षा निवास और वर्कषाप के लीये तीन मंजील इमारत का निर्माण करना चाहती है।
दि.15/2/2020 को भुमीपुजन कार्यक्रम संपन्न हुआ और 3 मार्च 2020 से भवन निर्माण का काम सभी सेवा भावी सन्माननियो के सहयोग से सुरू हो चुका है। इस कार्य पर करीब देड करोड रूप्ये की अनुमानीत लागत लगने की संभावना है।
इसीलीये आपसे विनम्रता पूर्वक निवेदन है की दिव्यांग सेवा के इष्वरीय कार्य मे आपका योगदान मीले , हाॅल, रूम, होस्टेल, किचन, डायनींग रूम आदी बनवाकर दे सकते है। या गीटटी, रेती, लोहा, सीमेंट, मुरूम या नगद राषी भी दे सकते है, आपके नगद राषी पर 80 जी अंतर्गत आयकर मे सवलत उपलब्ध है। दिव्यांग बालको के उत्थान और उज्वल भारत निर्माण के लीये संस्था आपका अनमोल सहयोग चाहती है आपकी थोडीसी भी मदत दिव्यांग बालको को आपकी किरण ला सकती है।